मुखिया के मुखारी – आवाज जनता की,कार्यकर्ता की नही सुनी जा रही है
मुखिया के मुखारी – आवाज जनता की,कार्यकर्ता की नही सुनी जा रही है
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – आवाज जनता की,कार्यकर्ता की नही सुनी जा रही है
मुखिया के मुखारी – हे! पूर्व सरकार पुलिस कों असरकार बने रहने दीजिए
मुखिया के मुखारी – समय आदिवासी सुशासन का -आपका समय सांय सांय {सन्नाटे} का
मुखिया के मुखारी – हिन्दू अस्मिता दिल्ली भी जीतेगी
मुखिया के मुखारी – नकटा के नाक कटाए सवा हाथ बाढय
मुखिया के मुखारी – प्रहार तों भीषणतम होंगा,संग्राम न्याय के लिए अंतिम होंगा
मुखिया के मुखारी – दिल्ली जीतना आपका अभी बहुत दूर का सपना है
मुखिया के मुखारी – हमें नही कहना अनपढ़, हमें नही बनना धनगढ़
मुखिया के मुखारी – दादी तों गयों-अब कुनबे की बारी है
मुखिया के मुखारी –छत्तीसगढ़िया परेशान-सरकारों का एक ही दंड विधान