SIR पर विजय शर्मा का बयान वायरल, बोले- “एक बार नहीं, 100 बार कटेगा नाम”; छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान

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कवर्धा:देशभर में SIR को लेकर बड़ा बवाल मचा हुआ है। CEC ज्ञानेश शर्मा के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस का लगातार आंदोलन चल रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक मार्च भी कर चुका है। इस बीच उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का एक वीडियो कवर्धा से वायरल हुआ है, जिसको लेकर सियासी बवाल मचना तय है। क्योंकि छत्तीसगढ़ में भी SIR का मुद्दा चुनाव के बाद से ही छाया रहा है और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने तो इस मुद्दे पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि 24 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम यहां SIR में काट दिए गए, जबकी भाजपा और कांग्रेस के बीच 2023 में जीत-हार का अंतर साढ़े 6 लाख था। इन्हीं चर्चाओं के बीच विजय शर्मा ने इस मुद्दे को अपने एक सनसनीखेज बयान से और गरमा दिया है।

विजय शर्मा का जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें उन्होंने कहा कि जिनका नाम यहां पर कटा है वो एक नहीं 100 बार कटेगा। छत्तीसगढ़ी में उन्होंने कहा कि एक ठन पठान तो कुवैत में रथे तेकर नाम इहां आके जुड़े हे, ता SIR में कटही नहीं ओखर नाम हा, 100 बार कटही याद रख लें। जेन ला जेन बोलना हे बोल लें हर हाल में काट के रखना चाहिए ओसन आदमी के नाम ला। (कुवैत से आए हुए एक पठान का नाम यहां पे जुड़ जाता है। ऐसे व्यक्ति के नाम एक नहीं 100 बार काटे जाएंगे, जिनको जो करना है कर लें।)

उपमुख्यमंत्री ने बढ़ाया सियासी पारा

उपमुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को कटे हुए नामों की पूरी जानकारी, पते के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और शहर में फ्लैक्स लगाने के निर्देश देने की बात भी कही। उपमुख्यमंत्री ने इन नामों की सूची कांग्रेस कार्यालय में सौंपने की बात कहकर सियासी पारा बढ़ा दिया है।

विजय शर्मा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

बता दें कि जिले में 60 हजार से अधिक नाम काटे जाने का दावा करते हुए कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। इसी मुद्दे पर विजय शर्मा ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि जब पिछली सरकार के समय कथित तौर पर बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जा रहे थे, तब कांग्रेस को यह सब क्यों नहीं दिखाई दिया ?

SIR में नाम काटा जाना सही- भाजपा नेता

वही भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि SIR में नाम काटा जाना सही है। बाहरी लोगों का नाम कवर्धा और पंडरिया विधानसभा में क्यों जोड़ा गया था।

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