कोरबा :एसईसीएल (SECL) के गेवरा क्षेत्र में भूविस्थापन और विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर प्रभावित गांवों की महिलाओं ने आंदोलन का ऐलान किया है। नराईबोध, मनगांव, रलिया और उमेंदीभाठा की महिलाओं ने प्रबंधन पर आश्वासन के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं करने का आरोप लगाया है। महिलाओं ने 12 अक्टूबर 2026 से गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही खदान परिसर में भी धरना प्रदर्शन करने की बात कही गई है।
आंदोलन को लेकर महाप्रबंधक को नोटिस भेजा गया है। इसमें प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं से जुड़े चार बिंदुओं और अपनी मांगों से संबंधित चार बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
पहले भी कई बार कर चुके हैं शिकायत और आंदोलन
प्रभावित महिलाओं के मुताबिक, उन्होंने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहले भी कई बार प्रबंधन को पत्र सौंपे हैं। इस दौरान विभिन्न स्तरों पर आंदोलन भी किए गए। महिलाओं का आरोप है कि प्रबंधन ने समस्याओं के जल्द निराकरण का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
महिलाओं का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याएं लंबित रहने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी वजह से अब अनिश्चितकालीन आंदोलन का निर्णय लिया गया है।
ब्लास्टिंग, धूल और मकानों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
आंदोलन के नोटिस में प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्रामसभा के प्रस्ताव, सहमति और पूर्व सूचना के बिना खुदाई की जा रही है। उनका कहना है कि खदान में होने वाली ब्लास्टिंग के कारण मकानों में क्षति पहुंच रही है और कई मकान जर्जर स्थिति में आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने खदान से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कोयला उत्खनन और उत्पादन पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
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बसाहट, पुनर्वास और मुआवजे का इंतजार
भूविस्थापित परिवारों की प्रमुख चिंताओं में बसाहट का निर्धारण, पुनर्वास, मुआवजा और स्थायी रोजगार शामिल हैं। महिलाओं का कहना है कि बसाहट तय करने, मूलभूत सुविधाएं विकसित करने और परिवारों को जगह आवंटित करने में लंबा समय लग सकता है।
उनके मुताबिक, यदि समय रहते पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीणों के सामने बेदखली जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। महिलाओं ने कुसमुंडा परियोजना के ग्राम जटराज में मकान तोड़े जाने के मामले का उल्लेख करते हुए आशंका जताई है कि पुनर्वास और नए मकान के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने पर प्रभावित परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
छोटे खातेदारों और भूमिहीनों के रोजगार का मुद्दा
प्रभावित ग्रामीणों ने वैकल्पिक रोजगार के मामले में भी प्रबंधन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कोल इंडिया पॉलिसी 2012 के तहत बड़े खातेदारों को रोजगार मिलने के कारण छोटे खातेदारों और भूमिहीन परिवारों के सामने आजीविका का संकट बना हुआ है।
महिलाओं का आरोप है कि वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा, ठेका कंपनियों में काम करने वाले कुछ श्रमिकों को हाई पावर कमेटी द्वारा निर्धारित मजदूरी नहीं मिलने और श्रमिकों के शोषण की शिकायतें भी उठाई गई हैं।



एकजुट होकर आंदोलन करेंगी महिलाएं
इन समस्याओं और मांगों को लेकर प्रभावित महिलाओं ने एकजुट होकर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रही। इनमें गोमती केवट, कलश बाई पटेल, पांचो बाई पटेल और इंद्रा प्रमुख रूप से शामिल थीं।
महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर 12 अक्टूबर 2026 से गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय के गेट पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। आंदोलन के नोटिस में खदान परिसर में भी प्रदर्शन करने की बात कही गई है।
फिलहाल, प्रभावित परिवारों की मांगों और आंदोलन को लेकर एसईसीएल प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रस्तावित धरने से पहले प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।




