मुखिया के मुखारी – हमें नही कहना अनपढ़, हमें नही बनना धनगढ़
मुखिया के मुखारी – हमें नही कहना अनपढ़, हमें नही बनना धनगढ़
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – हमें नही कहना अनपढ़, हमें नही बनना धनगढ़
मुखिया के मुखारी – दादी तों गयों-अब कुनबे की बारी है
मुखिया के मुखारी –छत्तीसगढ़िया परेशान-सरकारों का एक ही दंड विधान
मुखिया के मुखारी – धर्म की राह पर आपको लौटना ही होगा
मुखिया के मुखारी – महाकुंभ – धरा पे अलौकिक सत्ता का अवतरण है
मुखिया के मुखारी – जब जान लिया तों सजा में देरी क्यों ?
मुखिया के मुखारी – निर्जनता के सांय -सांय की आहट है ,सुगबुगाहट है
मुखिया के मुखारी – सदैव निन्यानवे की फेर में रहेंगे आप
मुखिया के मुखारी – दावों पर नही सबूतों पर राजनीति करिए
मुखिया के मुखारी – कलम के उजड़े आशियाने के लिए, कलम के लिए