9-10 घंटे कुर्सी पर बैठकर काम? बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा, डॉक्टर ने बताए 4 बड़े कारण

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Health News: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लंबे समय तक काम करना, घंटों डेस्क पर बैठे रहना, नींद पूरी न होना और लगातार तनाव जैसी आदतें आम हो गई हैं। शुरुआत में इनका असर सिर्फ थकान, चिड़चिड़ापन या सिरदर्द के रूप में नजर आ सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी दिनचर्या शरीर और खासकर दिल की सेहत पर असर डाल सकती है।

अगर किसी व्यक्ति की नौकरी में रोजाना 9-10 घंटे बैठकर काम करना शामिल है और इस दौरान शारीरिक गतिविधि बेहद कम है, तो वजन बढ़ने, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली को हृदय स्वास्थ्य के लिए नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. संजय कुमार के मुताबिक लंबे वर्किंग आवर्स, लगातार तनाव, कम शारीरिक गतिविधि और नींद की कमी मिलकर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

1. लंबे वर्किंग आवर्स और हार्ट डिजीज का कनेक्शन

सप्ताह में बहुत अधिक घंटे काम करने वाले लोगों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ने की बात सामने आई है। WHO और ILO के एक अध्ययन में सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने को 35-40 घंटे काम करने की तुलना में स्ट्रोक और इस्कीमिक हृदय रोग से मृत्यु के अधिक जोखिम से जोड़ा गया था।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 55 घंटे काम करते ही किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक हो जाएगा। लगातार लंबे समय तक ऐसा वर्क रूटीन और उससे जुड़ी दूसरी जीवनशैली संबंधी आदतें जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

2. लगातार तनाव भी दिल के लिए खतरे की घंटी

डेडलाइन, काम का दबाव और आराम के लिए पर्याप्त समय न मिलना लंबे समय तक तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है। तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे हृदय गति और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हृदय संबंधी समस्या है, तो लगातार तनाव को नजरअंदाज करना स्थिति को और खराब कर सकता है।

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3. घंटों कुर्सी पर बैठे रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है

डेस्क जॉब में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ काम के घंटे नहीं, बल्कि लगातार बैठे रहना भी है। लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से वजन बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और खराब लिपिड प्रोफाइल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए रोजाना व्यायाम करने के साथ-साथ दिनभर की बैठने वाली दिनचर्या को बीच-बीच में तोड़ना भी जरूरी है।

4. नींद की कमी का भी पड़ सकता है असर

देर रात तक काम करना और सुबह जल्दी उठना अगर रोज की आदत बन जाए तो नींद की अवधि और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। नियमित रूप से पर्याप्त नींद न लेने को हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा जाता है।

इसलिए काम के साथ शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय देना भी जरूरी है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

हर 30-60 मिनट में कुछ मिनट के लिए उठकर चलें।

सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज करें।

नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी दिनचर्या में शामिल करें।

रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।

संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।

धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।

समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें।

लगातार तनाव की स्थिति में काम और आराम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करें।

ध्यान दें: लंबे समय तक काम करना अकेले हार्ट अटैक का कारण नहीं माना जा सकता। हृदय रोग का जोखिम उम्र, आनुवंशिकता, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और अन्य कई कारकों पर निर्भर करता है। सीने में दर्द/दबाव, सांस फूलना, अचानक पसीना, चक्कर या जबड़े/बांह में दर्द जैसे गंभीर लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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