बिलासपुर : निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप
याचिका के अनुसार, शिकायतकर्ता एक योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IG) रतनलाल डांगी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे योग सीखना शुरू किया।
पीड़िता का आरोप है कि कुछ समय बाद डांगी ने उनके WhatsApp नंबर पर कथित तौर पर अश्लील संदेश भेजने शुरू कर दिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो कॉल के दौरान आईपीएस अधिकारी ने कथित रूप से अश्लील व्यवहार किया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं। आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा उनके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।
DGP के सामने भी की थी शिकायत
याचिका के मुताबिक, महिला ने मामले को लेकर 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद जांच के लिए आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
बाद में शिकायतकर्ता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
जांच प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि शिकायत की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी भूमिका को लेकर याचिकाकर्ता पहले ही आपत्ति जता चुकी हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
याचिका में जांच अधिकारी IG आनंद छाबड़ा को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता की ओर से उनके खिलाफ महादेव सट्टा एप मामले में आपराधिक प्रकरण विचाराधीन होने का दावा करते हुए कहा गया कि ऐसे में उन्हें इस संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी देना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
कथित संपत्तियों की जांच की भी मांग
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में रतनलाल डांगी से संबंधित कथित अवैध चल-अचल संपत्तियों की जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की थी।
शिकायत में रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा, बिलासपुर सहित राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन संपत्तियों से संबंधित शिकायतों की जांच भी अधिकारियों द्वारा उचित तरीके से नहीं की गई।
12 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट ने मांगा था जवाब
मामले में 12 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे संवेदनशील मामला मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था।
इसके बाद 2 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
अब हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जवाब नहीं आया तो कोर्ट में होगी अधिकारी की पेशी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो ऑफिसर-इन-चार्ज को 29 सितंबर 2026 को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।
मामले की अगली सुनवाई भी 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।




