बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में मानसिक रूप से अस्वस्थ और विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों के लिए संचालित घरौंदा केंद्रों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर के एक केंद्र में दिव्यांग व्यक्ति को पलंग से बांधकर रखने का मामला सामने आया है। वहीं, रायपुर के घरौंदा केंद्र में एक बच्चे समेत चार महिलाओं की मौत का खुलासा हुआ है। कोर्ट कमिश्नरों की निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई इन स्थितियों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर खामियां
घरौंदा केंद्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए हाईकोर्ट ने 11 कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की थी। इन कमिश्नरों ने शासन और केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत संचालित संस्थानों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की है। रिपोर्ट में बिलासपुर के एक केंद्र में दिव्यांग को पलंग से बांधकर रखने और रायपुर के केंद्र में चार महिलाओं तथा एक बच्चे की मौत की जानकारी सामने आई है।
इस खुलासे के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अब सरकार को केंद्रों की व्यवस्था और वहां रह रहे लोगों की सुरक्षा व देखभाल को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
रायपुर के घरौंदा केंद्र में पहले भी सामने आ चुका है मौत और बच्चों के लापता होने का मामला
रायपुर के घरौंदा केंद्र में आठ बच्चों की मौत और पांच बच्चों के लापता होने का मामला पहले ही हाईकोर्ट के संज्ञान में आ चुका है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने घटनाओं को अमानवीय बताते हुए सभी कोर्ट कमिश्नरों को जल्द निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
इससे पहले वित्त विभाग और समाज कल्याण विभाग के सचिवों के साथ मुख्य सचिव ने भी शपथपत्र दाखिल कर केंद्रों में रह रहे बच्चों के संबंध में जानकारी दी थी। शपथपत्र में बताया गया था कि बीते तीन वर्षों में शासन ने इन बच्चों की देखभाल पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
11 कोर्ट कमिश्नरों ने किया केंद्रों का निरीक्षण
हाईकोर्ट ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 11 कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए थे। इनमें अधिवक्ता विवेक श्रीवास्तव, अपूर्व त्रिपाठी, संघर्ष पाण्डेय, शिवाली दुबे और ईश्वर जायसवाल सहित अन्य शामिल हैं। इन सभी को विभिन्न घरौंदा केंद्रों का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, देखभाल और व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
निरीक्षण के बाद अदालत में पेश की गई रिपोर्टों में सामने आई स्थितियों ने केंद्रों के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
कोपलवाणी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है हाईकोर्ट
रायपुर की संस्था कोपलवाणी ने घरौंदा केंद्रों में बच्चों की स्थिति और कथित लापरवाही को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में वर्ष 2014 से एनजीओ की मदद से संचालित संस्था में बच्चों की देखभाल और भूखमरी से मौत के आरोपों को उठाया गया था। संस्था ने इस संबंध में पहले राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी लिखित शिकायत दी थी।
अब कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट में सामने आए नए तथ्यों के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली कार्रवाई सरकार के जवाब और निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।




