बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : जिले में जल संरक्षण को लेकर प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में धान की खेती न करें।

कलेक्टर ने अपील करते हुए कहा कि बेमेतरा जिला जल संकट की दृष्टि से वाटर क्रिटिकल जिला के रूप में चिन्हित है। भूजल स्तर लगातार गिर रहा था, जिसे लेकर पिछले वर्ष प्रशासन और किसानों ने मिलकर एक अनूठा प्रयोग किया था। किसानों ने स्वेच्छा से ग्रीष्मकालीन धान (Summer Paddy) न लगाने का संकल्प लिया था और उसके स्थान पर कम पानी वाली फसलें जैसे चना, गेहूं और सरसों की खेती की थी।
इस सामूहिक प्रयास का असर जमीन पर दिखा है। कलेक्टर ने बताया कि इस पहल के कारण जिले के तीनों विकासखंड – बेमेतरा, बेरला और साजा वाटर क्रिटिकल श्रेणी से निकलकर सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। यह जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है।
इसी सफलता को आगे बढ़ाने के लिए इस वर्ष भी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन ग्राम सभाओं में किसानों को जल संरक्षण का महत्व समझाया जा रहा है और उनसे ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाने का संकल्प लिया जा रहा है।
कलेक्टर ने कहा, “धान में सबसे ज्यादा पानी लगता है। अगर हम गर्मी में भी धान लगाएंगे तो हमारा भूजल स्तर फिर से नीचे चला जाएगा। चना, गेहूं, सरसों जैसी फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और जमीन की उर्वरा शक्ति भी बनाए रखती हैं।”
कलेक्टर ने सभी किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा – “पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।”
प्रशासन ने किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए बीज, तकनीकी सलाह और शासन की योजनाओं का लाभ देने का भी आश्वासन दिया है।




