नंदी महाराज के कान में मनोकामना क्यों कहते हैं? जानिए सही विधि, नियम और पौराणिक मान्यता

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भगवान शिव के मंदिरों में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद आपने नंदी महाराज के कान में कुछ कहते देखा होगा। आपने भी कभी न कभी अपनी मनोकामना नंदी जी के कान में कही होगी। कहते हैं कि नंदी के जरिए आप महादेव तक अपनी बात पहुंचाते हैं। तो फिर चलिए जानते हैं कि नंदी के कान में इच्छा क्यों कही जाती है। नंदी महाराज से अपनी बात कहने की सही विधि और नियम भी जानिए।

नंदी के कान में क्यों कहते हैं इच्छा?

महादेव के मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित होती है। दर्शन के दौरान कई श्रद्धालु नंदी के कान में अपनी इच्छा कहते हैं। कहा जाता है कि नंदी महाराज भगवान शिव के सबसे प्रिय गण हैं और भक्तों की प्रार्थना महादेव तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इसलिए उनके कान में कही गई सच्चे मन की बात भगवान शिव तक पहुंचती है।

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क्या कहती है पौराणिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव अक्सर तप और ध्यान में लीन रहते हैं। ऐसे में नंदी महाराज भक्तों और भगवान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव ने नंदी को यह आशीर्वाद दिया था कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ उनके कान में अपनी मनोकामना कहेगा, उसकी प्रार्थना भगवान तक पहुंचेगी और सही समय पर उसका शुभ फल मिलेगा।

मनोकामना कहने की सही विधि

सबसे पहले भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप करें। इसके बाद नंदी महाराज के पास जाकर मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का स्मरण करें। फिर उनके बाएं कान में अपनी इच्छा कहें और दाएं कान को अपने एक हाथ से बंद रखें। इस दौरान अपने मुंह को हाथ से ढक लें ताकि आपकी बात किसी अन्य व्यक्ति तक न पहुंचे। अंत में नंदी महाराज से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करें और उन्हें प्रसाद आदि अर्पित करें।

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इन बातों का रखें ध्यान

मान्यता है कि नंदी महाराज के कान में कभी भी ऐसी इच्छा नहीं कहनी चाहिए, जिससे किसी दूसरे का अहित हो। ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ या धर्म के विरुद्ध किसी भी कामना से बचना चाहिए। ईश्वर से प्रार्थना करते समय मन में श्रद्धा, सकारात्मक सोच और सच्ची भावना सबसे जरूरी है। निष्कपट भाव से की गई प्रार्थना ज्यादा फलदायी मानी गई है।

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