राम-रावण की भव्य झांकियों, विधि-विधान से रैनी पूजा और दो घंटे तक चली रामलीला ने मोहा मन; रावण दहन के बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/ छुरा : असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व वनांचल के ग्राम हीराबतर में बड़े ही हर्षोल्लास, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से तैयार रावण के विशाल पुतले का दहन देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। राम-रावण दल की आकर्षक झांकियां, पारंपरिक पूजा-अर्चना, जीवंत रामलीला और रावण दहन का भव्य दृश्य पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। वहीं, रावण दहन के पश्चात रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
ग्रामीणों के सहयोग से तैयार होता है रावण का विशाल पुतला
ग्राम हीराबतर में विजयादशमी का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण एकता, आपसी सहयोग और वर्षों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है। यहां प्रत्येक वर्ष दशहरा के अवसर पर समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से रावण का विशाल पुतला तैयार किया जाता है। इस आयोजन में गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता देखने को मिलती है। ग्रामीण मिल-जुलकर इस पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप देते हैं, जिससे गांव की सामूहिक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
बाजे-गाजे के साथ बैगा, पुजारी और ग्राम प्रमुखों को आमंत्रण
दशहरा की शाम होते ही गांव में उत्सव की रौनक और बढ़ जाती है। पारंपरिक रीति के अनुसार ग्राम के बैगा, पुजारी एवं ग्राम प्रमुखों को बाजे-गाजे के साथ रावण भाठा मैदान पहुंचने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखते ही बनती है। गांव की परंपराओं के अनुरूप होने वाली यह प्रक्रिया आयोजन को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
राम-रावण की भव्य झांकियां और दो घंटे तक रामलीला
ग्राम के नवयुवक मंडल द्वारा दशहरा पर्व को आकर्षक बनाने के लिए राम और रावण दल की भव्य झांकियों की विशेष तैयारी की जाती है। साज-सज्जा और पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित दोनों दल बाजे-गाजे के साथ रावण भाठा मैदान पहुंचते हैं। इसके बाद रावण एवं कचना धुर्वा स्थल पर विधि-विधानपूर्वक रैनी पूजा संपन्न की जाती है।पूजा-अर्चना के पश्चात रामलीला की शुरुआत होती है, जो लगभग दो घंटे तक चलती है। राम और रावण के बीच युद्ध के प्रसंगों का मंचन दर्शकों को आकर्षित करता है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, सत्य की शक्ति और अधर्म के अंत का संदेश जनमानस तक पहुंचता है। बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ इस पारंपरिक आयोजन का आनंद लेते हैं।
रावण दहन के साथ गूंजा जय श्रीराम का जयघोष
रामलीला के समापन के बाद निर्धारित परंपरा के अनुसार रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाता है। रावण दहन के साथ ही मैदान में उपस्थित ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन जाता है। यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की जीत और समाज में सत्य, सदाचार एवं मर्यादा की स्थापना का प्रतीक बनकर सामने आता है। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाती है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीण रहते हैं सजग, पुलिस भी करती है निगरानी
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति को देखते हुए आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर चाक-चौबंद व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया जाता है, वहीं पुलिस भी आयोजन के दौरान निगरानी रखती है और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेती है। सामूहिक सहभागिता और सुरक्षा के प्रति सजगता के चलते इस पारंपरिक आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में सहयोग मिलता है।
रावण दहन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम से सजी रात
रावण दहन के पश्चात रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही विजयादशमी का उत्सव देर रात तक उल्लासपूर्ण वातावरण में जारी रहता है। ग्रामीणों के सहयोग, युवाओं की सक्रिय भूमिका और पारंपरिक रीति-रिवाजों के समन्वय से ग्राम हीराबतर का दशहरा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
वनांचल की संस्कृति और सामूहिक एकता का अनूठा उदाहरण
वास्तव में ग्राम हीराबतर का रावण दहन कार्यक्रम वनांचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, धार्मिक आस्था और ग्रामीण एकजुटता का अनूठा उदाहरण है। यहां दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गांव के लोगों को एक सूत्र में जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अवसर भी बनता है। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और नवयुवक मंडल की सक्रियता इस आयोजन को विशेष बनाती है। यही कारण है कि ग्राम हीराबतर का पारंपरिक दशहरा और भव्य रावण दहन कार्यक्रम वास्तव में देखते ही बनता है।




