रायपुर : छत्तीसगढ़ के करीब 1.60 लाख शिक्षक (एलबी) संवर्ग के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला सुनाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन, सेवा लाभ और अन्य शासकीय सुविधाओं की गणना शिक्षाकर्मी के रूप में पहली नियुक्ति की तारीख से नहीं होगी। इसके लिए केवल 1 जुलाई 2018, यानी संविलियन की तिथि को ही आधार माना जाएगा।
सरकार के इस आदेश से उन हजारों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है, जो वर्षों से पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि जोड़कर पेंशन और अन्य लाभ देने की मांग कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में शिक्षक पहले पंचायत और नगरीय निकायों के अंतर्गत शिक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत थे। राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2018 को इन शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया, जिसके बाद वे शिक्षक (एलबी) संवर्ग में शामिल हुए।
शिक्षकों की मांग थी कि उनकी वर्षों की पूर्व सेवा को भी शासकीय सेवा मानते हुए पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना की जाए।
सरकार ने क्या कहा?
स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार—
शिक्षक (एलबी) संवर्ग के सभी सेवा लाभों की गणना 1 जुलाई 2018 से ही होगी।
इससे पहले शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को शासकीय सेवा नहीं माना जाएगा।
इसलिए पहली नियुक्ति से सेवा जोड़कर पेंशन या अन्य लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं है।
उदाहरण से समझिए
यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति 2008 में शिक्षाकर्मी के रूप में हुई और 1 जुलाई 2018 को उनका संविलियन हुआ, तो वर्ष 2038 में सेवानिवृत्ति पर उनकी सेवा 2008 से नहीं बल्कि 2018 से गिनी जाएगी। यानी 30 वर्ष नहीं, केवल 20 वर्ष की शासकीय सेवा के आधार पर पेंशन तय होगी।
इसी तरह यदि एक शिक्षक की नियुक्ति 2007 और दूसरे की 2010 में हुई हो, तब भी दोनों की सरकारी सेवा 1 जुलाई 2018 से ही मानी जाएगी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
यह मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट तक पहुंचा था। 23 जनवरी 2026 को अदालत ने राज्य सरकार से संवैधानिक और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने को कहा था।
सरकार ने विचार के बाद अब स्पष्ट आदेश जारी करते हुए शिक्षकों की मांग अस्वीकार कर दी है।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि 1 जुलाई 2018 से पहले शिक्षक पंचायत एवं नगरीय निकायों के कर्मचारी थे, राज्य शासन के नियमित कर्मचारी नहीं। इसलिए उस अवधि को शासकीय सेवा मानकर पेंशन और अन्य सेवा लाभ नहीं दिए जा सकते।
अब आगे क्या होगा?
सरकार के इस फैसले के बाद एलबी शिक्षकों में नाराजगी बढ़ सकती है। यदि शिक्षक इस निर्णय से असंतुष्ट हैं तो वे दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले पर आगे कानूनी लड़ाई की संभावना बनी हुई है।

