प्रयोग आश्रम तिल्दा-सासाहोली में समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात; विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव, नशामुक्ति, शिक्षा, किसान आत्मनिर्भरता और जैविक खेती पर हुई विस्तृत चर्चा
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : विश्व शांति निवानो पुरस्कार से सम्मानित गांधीवादी एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजगोपाल पी. व्ही. छत्तीसगढ़ के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रयोग आश्रम, तिल्दा-सासाहोली में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पहुंचे समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों से मुलाकात कर समाज और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत संवाद किया।संवाद के दौरान विश्व शांति कैसे स्थापित हो, देश और समाज में आपसी भाईचारा एवं सामाजिक सद्भाव कैसे मजबूत हो, समाज में व्याप्त बुराइयों को कैसे दूर किया जाए, नशामुक्त समाज का निर्माण कैसे हो, आज की शिक्षा कैसी होनी चाहिए, किसान आत्मनिर्भर कैसे बनें और जैविक खेती को कैसे बढ़ावा दिया जाए, जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
विश्व शांति की शुरुआत समाज में आपसी सद्भाव से
राजगोपाल पी. व्ही. के साथ हुए संवाद में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि विश्व शांति केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली पहल का विषय नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत व्यक्ति, परिवार, गांव और समाज से होती है। जब समाज में आपसी विश्वास, सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना मजबूत होगी, तभी देश में स्थायी शांति और सामाजिक सद्भाव का वातावरण निर्मित किया जा सकता है।इस दौरान समाज में जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और अन्य आधारों पर पैदा होने वाले मतभेदों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से कम करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। लोगों ने कहा कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के विचारों और अधिकारों का सम्मान करते हुए भाईचारा, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता को मजबूत करना जरूरी है।
राजगोपाल पी. व्ही. ने सामाजिक परिवर्तन के लिए हिंसा और टकराव के स्थान पर संवाद, अहिंसा, सहयोग और सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया। उनका मानना है कि शांति केवल संघर्ष की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, न्याय और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की निरंतर प्रक्रिया है।
युवाओं को नशे से दूर रखना समाज की बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करने की जरूरत बताई गई। युवाओं को शिक्षा, खेल, रोजगार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
शिक्षा में ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों पर जोर
आज की शिक्षा कैसी होनी चाहिए, इस विषय पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित न रखते हुए उसमें मानवीय संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी, प्रकृति के प्रति सम्मान, आत्मनिर्भरता और नैतिक मूल्यों को शामिल करने की आवश्यकता बताई गई।
किसान आत्मनिर्भर हों और जैविक खेती को मिले बढ़ावा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की स्थिति पर चर्चा करते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया। स्थानीय संसाधनों के उपयोग, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, जैविक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
वहीं गांवों का योजना ग्राम सभा में प्रस्तावित हो कि आखिर वहां के ग्रामीण क्या चाहते हैं अपने गांव व क्षेत्र के विकास के लिए वे कैसे डेवलपमेंट चाहते हैं उस आधार पर योजनाएं संचालित हों, योजनाओं का केंद्रीयकरण न हो तभी अंतिम लोगों तक योजनाएं पहुंच पाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि गांवों की मजबूती देश की आर्थिक और सामाजिक मजबूती से सीधे जुड़ी है। इसलिए किसान, गांव और ग्रामीण युवाओं को केंद्र में रखकर विकास की दिशा तय करने की आवश्यकता है।
गरियाबंद जिले से भी बड़ी संख्या में लोगों ने की सहभागिता
इस महत्वपूर्ण संवाद में गरियाबंद जिले से भी बड़ी संख्या में समाज प्रमुख, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, संगठन से जुड़े पदाधिकारी एवं अन्य लोग शामिल हुए। गरियाबंद से पहुंचे लोगों ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सद्भाव, नशामुक्ति, शिक्षा, कृषि और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर भी राजगोपाल पी. व्ही. के साथ विचार साझा किए।
प्रयोग आश्रम तिल्दा-सासाहोली में हुआ यह संवाद विश्व शांति से लेकर गांव की खुशहाली तक विभिन्न स्तरों पर सामाजिक बदलाव की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए ऐसे संवाद लगातार होते रहना आवश्यक है, ताकि लोगों के बीच आपसी विश्वास बढ़े और शांति, सद्भाव, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो।




