कवर्धा टेकेश्वर दुबे : आदिवासी छात्रा से संबंधित पुरानी घटना को लेकर मीडिया और विभिन्न माध्यमों में लगाए जा रहे आरोपों के बीच गुरुकुल पब्लिक स्कूल, कवर्धा प्रबंधन ने अपना तथ्यात्मक पक्ष सामने रखा है। संस्था ने कहा है कि संवेदनशील मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित परिवार के पक्ष, FIR, विद्यालय के अभिलेख और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन किया जाना आवश्यक है।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, बीजापुर के आवापल्ली क्षेत्र में दर्ज FIR में ऐसा उल्लेख नहीं है कि छात्रा के गर्भवती होने की जानकारी के कारण उसके पालक उसे लेने आए थे। संस्था का कहना है कि उस समय विद्यालय को छात्रा की गर्भावस्था की कोई जानकारी नहीं थी।
153 दिन विद्यालय में उपस्थित, 181 दिन घर पर रही छात्रा
विद्यालय के उपलब्ध उपस्थिति रिकॉर्ड का हवाला देते हुए प्रबंधन ने बताया कि अप्रैल 2024 से 4 फरवरी 2025 तक कुल 334 दिनों में छात्रा 153 दिन विद्यालय में उपस्थित रही, जबकि 181 दिन वह अपने घर पर रही। दिसंबर माह में भी छात्रा 16 दिन विद्यालय और 15 दिन घर पर रही।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा का आवागमन लगातार विद्यालय और घर के बीच होता रहा। उसके अत्यंत दुबले शारीरिक स्वरूप और स्पष्ट शारीरिक परिवर्तन दिखाई नहीं देने के कारण गर्भावस्था का अनुमान लगा पाना सहज नहीं था। ऐसे में बाद में सामने आई जानकारी के आधार पर संस्था पर पहले से जानकारी होने या मामले को छिपाने का आरोप लगाना उपलब्ध अभिलेखों से प्रमाणित नहीं होता।
बहन को मुफ्त शिक्षा देने के आरोप पर भी स्कूल ने दी सफाई
मामले को दबाने के लिए छात्रा की छोटी बहन को निःशुल्क शिक्षा देने का कथित प्रलोभन दिए जाने के आरोप को भी विद्यालय ने खारिज किया है। संस्था के अनुसार संबंधित बच्ची छात्रा की बहन नहीं है और न ही वह संस्था में अध्ययनरत है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि संस्था में पढ़ने वाली बच्ची उसके गांव की दूर की रिश्तेदार है, जिसका प्रवेश जवाहर उत्कर्ष योजना के तहत हुआ है। इसके समर्थन में संस्था के पास संबंधित प्रवेश/आदेश की प्रति उपलब्ध होने की बात कही गई है।
प्रसव स्थान को लेकर भी दस्तावेजों का हवाला
प्रबंधन ने प्रसव स्थान को लेकर सामने आ रहे दावों पर भी सवाल उठाया है। संस्था के अनुसार उसके पास उपलब्ध FIR में प्रसव स्थान के संबंध में अलग तथ्य दर्ज है, जिसमें छात्रा का प्रसव उसके गांव के अस्पताल में होना उल्लेखित है। स्कूल ने कहा कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक बयान देने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों का अवलोकन किया जाना चाहिए।
आधार कार्ड में बदलाव से संस्था का कोई संबंध नहीं
आधार कार्ड में किए गए कथित बदलावों को लेकर भी स्कूल ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संस्था का कहना है कि आधार कार्ड में किसी भी प्रकार के परिवर्तन में विद्यालय की कोई भूमिका नहीं थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये परिवर्तन छात्रा के पालकों द्वारा जवाहर उत्कर्ष योजना में प्रवेश के उद्देश्य से किए गए थे।
“संस्था ने न कुछ छिपाया, न किसी अनियमितता को संरक्षण दिया”
गुरुकुल पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि घटना के समय संस्था को छात्रा की गर्भावस्था की जानकारी नहीं थी। स्कूल ने न तो किसी तथ्य को छिपाने का प्रयास किया और न ही किसी अनियमितता को संरक्षण दिया।
संस्था ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और गरिमा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीरता से पालन किया जा रहा है।
विद्यालय प्रबंधन ने अपील की है कि लगभग चार वर्ष पुरानी संवेदनशील घटना में अपुष्ट आरोपों के बजाय FIR, विद्यालय अभिलेख और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाए। साथ ही छात्रा और उसके परिवार की निजता, गरिमा और मानसिक स्थिति का सम्मान करने की अपील की गई है।
गुरुकुल पब्लिक स्कूल का कहना है कि संस्था आज भी विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

