हेल्थ डेस्क : खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है। ऐसे में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि तेल रिफाइंड है या नहीं, बल्कि उसके फैटी एसिड प्रोफाइल, ट्रांस फैट की मात्रा, इस्तेमाल की मात्रा और खाना पकाने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है।
खास तौर पर औद्योगिक ट्रांस फैट और आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेलों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ट्रांस फैट का सेवन हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है और इसे कुल ऊर्जा सेवन के 1 प्रतिशत से कम रखना चाहिए।
वनस्पति घी से क्यों बरतें सावधानी?
वनस्पति घी यानी कुछ प्रकार के वेजिटेबल शॉर्टनिंग में औद्योगिक ट्रांस फैट मौजूद हो सकता है। WHO ने वनस्पति घी और आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेलों को औद्योगिक ट्रांस फैट के स्रोतों में शामिल किया है। ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करने से जुड़ा है। इससे हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
WHO के अनुसार ट्रांस फैट का कोई ज्ञात स्वास्थ्य लाभ नहीं है और इसे आहार से जितना संभव हो कम करना चाहिए।
क्या हर रिफाइंड तेल नुकसानदायक है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। रिफाइंड तेल को सिर्फ इसलिए नुकसानदायक नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह रिफाइंड है। तेल की गुणवत्ता उसके प्रकार, फैटी एसिड संरचना, प्रोसेसिंग और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन कैनोला, कॉर्न, जैतून, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और कुछ अन्य गैर-उष्णकटिबंधीय वनस्पति तेलों को ऐसे विकल्पों में शामिल करता है जिनमें असंतृप्त वसा अधिक होती है। इनका इस्तेमाल संतृप्त और ट्रांस फैट वाले वसा स्रोतों की जगह किया जा सकता है।
इसलिए किसी एक तेल को सभी लोगों के लिए ‘सबसे खराब’ या ‘सबसे अच्छा’ बताने के बजाय कम ट्रांस फैट और बेहतर फैट प्रोफाइल वाले तेल का सीमित मात्रा में इस्तेमाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कुकिंग ऑयल खरीदते समय क्या देखें?
तेल खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें। खास तौर पर ‘partially hydrogenated oil’ या ट्रांस फैट की मौजूदगी पर ध्यान देना चाहिए। WHO औद्योगिक ट्रांस फैट को खत्म करने की दिशा में काम करने की सिफारिश करता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी ऐसे तेल चुनने की सलाह देता है जिनमें संतृप्त वसा कम हो और आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल या ट्रांस फैट न हो।
देसी घी और सरसों तेल का क्या?
देसी घी का सेवन भी मात्रा को ध्यान में रखकर करना चाहिए, क्योंकि इसमें संतृप्त वसा होती है। बहुत ज्यादा संतृप्त वसा LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती है।
वहीं सरसों तेल भारतीय खानपान में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। हालांकि किसी एक तेल को हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य रूप से सबसे बेहतर बताने के बजाय तेल की मात्रा, पूरी डाइट और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना ज्यादा उचित है।
एक और जरूरी बात यह है कि खाना पकाने के दौरान तेल को बार-बार गर्म या इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तेल से धुआं निकलने लगे तो वह खराब होने की प्रक्रिया में पहुंच चुका होता है और इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करने की सलाह नहीं दी जाती।




