परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/रायपुर :पोलावरम परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित होने वाले कोंटा क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के अधिकारों और उनके जल, जंगल एवं जमीन की सुरक्षा को लेकर सुकमा में आदिवासी कांग्रेस एवं जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में विशाल जन आक्रोश सभा एवं रैली का आयोजन किया गया। रैली में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनक ध्रुव शामिल हुए और प्रभावित आदिवासी समुदायों की मांगों को मजबूती से उठाया।सभा को संबोधित करते हुए विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि पोलावरम परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित होने वाले आदिवासी परिवारों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर यदि किसी समुदाय को अपनी जमीन, गांव और पारंपरिक जीवन से विस्थापित होना पड़े, तो उसके लिए न्यायपूर्ण मुआवजा, पारदर्शी सर्वेक्षण और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का संबंध केवल जमीन के एक टुकड़े से नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन के साथ उसकी संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और पीढ़ियों पुरानी विरासत से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी भी परियोजना से प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी चिंताओं को समझे बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
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पारदर्शी सर्वेक्षण और उचित पुनर्वास की मांग
जन आक्रोश सभा के दौरान कांग्रेस नेताओं एवं आदिवासी समाज की ओर से मांग रखी गई कि पोलावरम परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों और परिवारों का निष्पक्ष एवं पारदर्शी सर्वेक्षण कराया जाए। प्रभावित परिवारों को उनकी जमीन, संपत्ति एवं आजीविका के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए तथा पुनर्वास की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों की बात और अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।वक्ताओं ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें उनके पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश से बेदखल करना। प्रभावित आदिवासी परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने और पुनर्वास प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए जाने की आवश्यकता है।
कांग्रेस नेताओं ने भी उठाई प्रभावित परिवारों की आवाज
कार्यक्रम में बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हरीश कवासी, दंतेवाड़ा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तूलिका कर्मा सहित आदिवासी कांग्रेस एवं कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।जन आक्रोश सभा के बाद आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और पोलावरम परियोजना से संभावित प्रभावित आदिवासी परिवारों के अधिकारों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक गांव या क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों की बात सुने बिना किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी।सभा में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी सहमति, अधिकार और सम्मान को ध्यान में रखकर आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।




