₹14.56 करोड़ बैंक घोटाला: फरार पूर्व शाखा प्रबंधक तमिलनाडु से गिरफ्तार

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बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : वर्ष 2022 में प्रार्थी रज्जू पाटनवार पिता संतोश कुमार पाटनवार उम्र 39 वर्ष साकिन शाखा प्रबंधक इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा बेमेतरा गस्ती चौक दुर्ग रोड बेमेतरा थाना जिला बेमेतरा ने रिपोर्ट दर्ज कराया है कि तात्कालिक बैंक प्रबंधक विनित दास द्वारा आपराधिक षडयंत्र कर बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए वित्तीय अनियमितता व अवैधानिक रूप से खातों में धन राशि अंतरण कर बैंक के साथ सहयोगी कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा, एवं टीकाराम माथुर के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र कर बैंक से लगभग 145609693.01 रूपये (चौदह करोड छप्पन लाख नौ हजार छ सौ तिरानबे रूपये) का हेर फेर कर धोखाधडी करने के संबंध में क्षेत्रिय कार्यालय रायपुर से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने एवं निर्देशित करने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु लिखित आवेदन पेश कर रहा हूं। आवेदन पत्र के अवलोकन पर प्रथम दृष्टया आरोपियों का कृत्य धारा 420, 409, 120बी, 34 भादवि का अपराध घटित करना पाए जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

प्रकरण में विवेचना के दौरान पूर्व में आरोपी 01.कमलेश सिन्हा निवासी बेमेतरा, 02. जोहन सिन्हा निवासी केवाछी जिला बेमेतरा, 03. टीकाराम माथुर निवासी बिरमपुर थान दाढ़ी जिला बेमेतरा, 04. नागेश वर्मा निवासी केवांछी जिला बेमेतरा को गिरफ्तार किया गया था। प्रकरण में अन्य आरोपी की पता तलाश की जा रही थी।

मामले की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए पुलिस महानिरीक्षक महोदय दुर्ग रेंज (IGP) अभिषेक शांडिल्य (भा.पु.से.) के सतत मॉनिटरिंग एवं पुलिस अधीक्षक (SP) त्रिलोक बंसल (भा.पु.से.) के निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव, एसडीओपी बेमेतरा भुषण एक्का के मार्गदर्शन में एक टीम गठित कर अपराध के गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बेमेतरा निरीक्षक सोनल ग्वाला एवं थाना स्टाफ को उक्त प्रकरण में आरोपी पता साजी हेतु लगाया गया।

प्रकरण में विवेचना के दौरान प्रकरण के आरोपी विनीतदास पिता सुप्रभातदास उम्र 40 वर्ष निवासी मकान नं. 162 के सामने अशोक नगर पो. डोरंडा थाना अरगोड़ा जिला राची झारखण्ड हाल पदस्थापना इंडियन ओवरसीज बैंक क्षेत्रीय कार्यालय तंजावुर तमिलनाडू को 29.07.2026 को गिरफ्तार कर ट्रांजिस्ट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया।

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प्रकरण में आरोपी विनीत दास द्वारा प्रणालियों व प्रक्रियाओं का घोर उलंघन किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सभी धोखाधड़ी की घटनाए विभिन्न कर्जदारों एवं बिचौलिये कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और श्री टीकाराम माथुर के साथ अपाराधिक षड्यंत्र के द्वारा किया गया है। उधारकर्ता द्वारा ऋण सुविधा के प्रयोग का विवरण एवं धोखाधड़ी का कारण निन्नानुसार सूचीबध है: कुल खाता धारक 180 TOTAL Rs. 16,01,84,785.00 बैंक के आंतरिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर निम्नलिखित धोखाधड़ी गतिविधियों को पाया गया है।

1.कुछ मामलों में, युनिट है ही नहीं या युनिट बंद थे।

2. एसएचजी ऋण के मामले में, पहली व दूसरी डोस में बहुत उच्च राशि की स्वीकृति एवं संवितरित की गई जो कि एसएचजी के मास्टर परिपत्र का उलंघन है।

3. ग्राहक के हस्ताक्षर बिना खातो के बीच अनाधिकृत हस्तांतरण और एक एसएचजी खाते में एसएचजी पदाधिकारियों की जानकारी के बिना, अनाधिकृत नकदी निकास, जहाँ हस्ताक्षर मेल नहीं खाते, रिपोर्ट की गई।

4. कृषि फार्म मेकानिज्म सावधि ऋण के मामले में, डीलर के खाते में स्वीकृत ऋण राशि का हस्तांतरण किया गया लेकिन सम्पत्ति उपलब्ध नहीं थी।

5. कुछ मामलों में, सप्लायर का जीएसटी नम्बर फर्जी थे एवं ऋण स्वीकृत करते समय शाखा द्वारा सप्लायर का क्रेडेंसियल सत्यापित नहीं किया गया।

6. उधारकर्ता की पात्रता का ठीक से पता नहीं लगाया गया, केसीसी ऋणों के मामले में अधिक वित्तपोषित किया गया।

7. शाखा ने केवल अनुकूलन करने के उद्देश्य से विभिन्न ऋणों की स्वीकृति की।

8. कई मामलों में यह पाया गया है कि ऋण प्रक्रियाओं को बदला एवं चुराया गया है।

9. कुछ मामलों में, ग्रेड के अनुसार शाखा प्रबंधक की विवेकाधीन शक्तियों का उल्लंघन किया गया है।

10. कई केसीसी ऋण में, जहाँ जरूरत थी वहाँ शाखा द्वारा अनुमोदित मूल्यांकक से मूल्यांकन रिपोर्ट और कानूनी राय प्राप्त नहीं की गई। कुछ मामलों में अधिवक्ता द्वारा कानूनी राय ली गई है जो कि हमारे पैनल के अधिवक्ता नहीं है।

11. केसीसी ऋण भूमि दस्तावेजों में उल्लेखित फसल पैटर्न के अनुसार स्वीकृत नहीं है जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त वित्तपोषण हुआ है।

12. कई सावधि ऋणों में, उधारकर्ता द्वारा पर्याप्त मार्जिन राशि का संचार नहीं किया गया।

13. मत्सय विभाग को झूठा सैद्धांतिक स्वीकृत पत्र जारी कर ऋण लेने वाले, श्री योगेंद्र साहू और दिलीप साहू को सात सात लाख मत्स्य सावधि ऋण स्वीकृत की बात कही गई है, लेकिन शाखा ने केसीसी ऋणों में प्रत्येक को दस लाख रुपये मजूर किए है। युनिट मौजूद नहीं है।

14. मत्स्य विभाग से ऋण स्वीकृत करने केलिए आवेदन प्राप्त हुआ, जहाँ पूंजी सब्सिडी उपलब्ध है लेकिन शाखा ने केसीसी योजना के तहत ऋण स्वीकृत किया था। शाखा द्वारा सब्सिडी का दावा नहीं किया गया। मत्स्य विभाग के साथ कोई संयुक्त निरीक्षण किया गाय।

15. मत्स्य ऋण का संवितरण नकद द्वारा आहरण किया गया।
16. कई केसीसी ऋण में यह पाया गया है कि उधारकर्ता के नाम पर भूमि नहीं है। भूमि धारक से उचित गारंटी नहीं ली गई है।

17. केसीसी ऋण उधारकर्ता की पत्रता मानदंड के संदर्भ से अधिक वित्तपोषित है। इन ऋणों को जिले के फसल पैटर्न के अनुसार वित्तपोषित नहीं किया गया।

18. विशाल एग्रो के सीसी खाते में सम्पत्ति तीसरे पक्षकार के नाम पर है लेकिन शाखा ने सीसी लिमिट स्वीकृति दी है। श्री सुरेश तिवारी द्वारा दिनांक 09.03.2020 की कानूनी राय के अनुसार, उधारकर्ता सम्पत्ति का परिचालक है। उसके पास सम्पत्ति का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। यह भी बताया गया है कि यह भूमि सरफेसी अधिनियम लागू नहीं है। भूमि रिकॉर्ड के अनुसार वह भूमि सरकारी भूमि के रूप चिन्हित है।

19. सीसी खाते के लिए उधारकर्ता से स्टॉक विवरण नहीं लिया गया है और सीसी खाते के लिए शाखा सही डीपी का पता लगाने में विफल रही है।

20. खातों में लेनदेन विशेषकर नकदी उधार खाते के मामले में शाखा द्वारा निगरानी नहीं की गई। उधारकर्ता द्वारा निधि का उद्देश्य से अलग प्रयोग किया गया।

21. यह पता चला है कि कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टिकाराम माथुर शाखा के बिचोलिये के रूप में काम कर रहे थे। बैंक के दिशानिर्देश के अनुसार यदि कहीं भी शाखाओं से जुड़े स्टाफ सदस्यों ने देखा कि शाखा प्रमुख या शाखा के अन्य अधिकारी अस्वस्थ प्रक्रयाओं में लिप्त है और क्रेडिट सुविधा का विस्तार करने में निर्धारित प्रणाली और प्रक्रियाओं से विचलित हो रहे है जो बैंक के हित में नहीं है, तो ऐसे मामले की रिपोर्ट तत्काल अपने नियंत्रण कार्यालयों को करनी है।

बैंक द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का अनुपालन किए बिना बिचौलिये और तीसरे पक्षकार से मिलकर अपराधिक षड़यंत्र द्वारा अंधाधुंध ऋण देकर अपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी एवं बैंक के सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है। संदिग्ध सं. 1 ने तीसरे पक्ष के साथ मिलकर बैंक के साथ अपराधिक दुर्विनियोजन, अपराधिक विश्वासघात, अपराधिक षड़यंत्र, बेईमानी तथा बैंकिंग दस्तावेजों के साथ जालसाजी किया है जिसके फलस्वरूप शिकायतकर्ता बैंक का रु. 145609693.01/- रूपये (चौदह करोड छप्पन लाख नौ हजार छ सौ तिरानबे रूपये) की हानि हुई है।

उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बेमेतरा निरीक्षक सोनल ग्वाला, सउनि जितेन्द्र कश्यप, आरक्षक पुरूषोत्तम कुंभकार सहित समस्त पुलिस स्टाफ का महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।

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