मुखिया के मुखारी – आप उड़ता तीर नही ताड़ (पेंड़) ले रहे ,दर्द आपार ले रहे
मुखिया के मुखारी – आप उड़ता तीर नही ताड़ (पेंड़) ले रहे ,दर्द आपार ले रहे
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – आप उड़ता तीर नही ताड़ (पेंड़) ले रहे ,दर्द आपार ले रहे
मुखिया के मुखारी – लोकतंत्र में बहुमत का सम्मान करना सीखिए
मुखिया के मुखारी – भगवा रंगा पूरा देश सिर्फ सियार छूटे
मुखिया के मुखारी – जुगलबंदी, जुगलबंदी बस जुगलबंदी की राजनीति हो रही है
मुखिया के मुखारी – सनातनियों ने भगवा चुन लिया
मुखिया के मुखारी – दावा दिखावा या सही में हैं सुशासन?
मुखिया के मुखारी – सरकारें बदलती हैं,व्यवस्थाएं नही बदलती
मुखिया के मुखारी – गुलाबों से काँटों को निकाल फेंकिए
मुखिया के मुखारी – स्वहित में -सत्ता क्या कलम के रंग भी बेरंग हो जाते है…
मुखिया के मुखारी – जैसे -जैसे बढ़ रहा पूजन वैसे -वैसे बढ़ रहा मुंह का सुजन