त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक मामले में 15 दिन बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग, DEO ने कहा- जांच टीम गठित; दोषी मिले तो होगी विभागीय कार्रवाई

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परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/छुरा : शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत सितंबर 2026 में आयोजित त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही व्हाट्सएप ग्रुपों में कथित रूप से साझा किए जाने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। मामले को लेकर जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने सेवा सेतु अभियान के तहत छुरा ब्लॉक के दुल्ला हाई स्कूल में आयोजित विशेष शिविर के दौरान जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी गरियाबंद को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विकासखंड क्षेत्र के संकुल केंद्र दुल्ला तथा संकुल केंद्र नयापारा से संबंधित व्हाट्सएप ग्रुपों में त्रैमासिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र परीक्षा प्रारंभ होने से पहले ही साझा किए गए। यदि जांच में परीक्षा शुरू होने से पूर्व प्रश्न-पत्र के अनधिकृत प्रसार की पुष्टि होती है, तो इससे परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता और मूल्यांकन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

परीक्षा की गोपनीयता पर गंभीर सवाल
किसी भी परीक्षा में प्रश्न-पत्र की गोपनीयता बनाए रखना परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विभाग और अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्न-पत्र के किसी अनधिकृत माध्यम से प्रसारित होने का आरोप सामने आना विद्यार्थियों के बीच समान अवसर और परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर चिंता पैदा करता है।शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कुछ विद्यार्थियों अथवा अन्य लोगों तक प्रश्न-पत्र पहले पहुंचा होगा, तो उन्हें अनुचित लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के साथ भी इससे अन्याय की स्थिति बन सकती है।इसीलिए शिकायतकर्ता ने केवल व्हाट्सएप ग्रुप में प्रश्न-पत्र साझा किए जाने की जांच तक मामला सीमित रखने के बजाय प्रश्न-पत्र तैयार होने से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने, संकुल केंद्रों तक पहुंचने और परीक्षा केंद्रों में वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

DEO के कथित बयान को लेकर भी उठे सवाल
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कथित रूप से दिए गए एक बयान को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब पत्रकारों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया तो कथित रूप से यह कहा गया कि “उपरोक्त परीक्षा सामान्य स्तर की है और इसके अंक नहीं जुड़ते हैं।”शिकायतकर्ता ने इस कथित बयान की भी जांच की मांग की है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी ने वास्तव में किस संदर्भ में यह बात कही और त्रैमासिक परीक्षा के अंकों को लेकर विभागीय प्रावधान क्या हैं, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों एवं जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

शिकायत में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक GENCOR 6083/2025/20-1, नया रायपुर, दिनांक 26 सितंबर 2025 का हवाला देते हुए त्रैमासिक परीक्षा के अंकों को मुख्य/वार्षिक मूल्यांकन से जोड़े जाने का दावा किया गया है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने विभागीय आदेश की वास्तविक स्थिति और कथित बयान के संदर्भ की भी जांच कराने की मांग की है।

कलेक्टर को सौंपे आवेदन में कई बिंदुओं पर जांच की मांग
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में विशेष रूप से उन व्हाट्सएप ग्रुपों की जांच की मांग की गई है, जिनमें कथित तौर पर परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्न-पत्र साझा किए गए।

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जांच में यह पता लगाने की मांग की गई है कि—
प्रश्न-पत्र किस तारीख और किस समय व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया?
उसे किस व्यक्ति द्वारा साझा किया गया?
प्रश्न-पत्र मूल रूप से कहां से प्राप्त हुआ?
परीक्षा शुरू होने से पहले वह किन-किन लोगों तक पहुंचा?
प्रश्न-पत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
संकुल केंद्रों एवं परीक्षा केंद्रों तक प्रश्न-पत्र पहुंचाने की प्रक्रिया क्या थी?
यदि प्रश्न-पत्र परीक्षा पूर्व प्रसारित हुआ तो वह किस स्तर से बाहर आया?
इन सभी बिंदुओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।

15 दिन बाद भी जांच की प्रगति स्पष्ट नहीं
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले को लेकर आवेदन दिए करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जांच की प्रगति और ठोस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।हालांकि जिला प्रशासन की ओर से जांच कराए जाने की बात कही गई है और जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार जांच टीम भी गठित की जा चुकी है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच टीम ने अब तक किन लोगों के बयान लिए हैं, संबंधित व्हाट्सएप ग्रुपों और दस्तावेजों की जांच किस स्तर तक पहुंची है तथा मामले में क्या तथ्य सामने आए हैं।

कलेक्टर रणवीर शर्मा बोले- DEO को अवगत कराया गया
मामले को लेकर जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रणवीर शर्मा से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि शिकायत संबंधी आवेदन प्राप्त हुआ है और आवेदन के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

DEO राजेश चन्द्राकर बोले- जांच टीम गठित
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकर ने बताया कि मामले की जांच के लिए जांच टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत
शिकायत के साथ मामले से जुड़े कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें कथित रूप से संकुल समन्वयकों द्वारा संकुल के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे गए प्रश्न-पत्र के स्क्रीनशॉट तथा स्कूल शिक्षा विभाग का 26 सितंबर 2025 का संबंधित आदेश शामिल है।इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि प्रश्न-पत्र कब और किस माध्यम से साझा हुआ तथा परीक्षा शुरू होने से पहले उसके प्रसार की वास्तविक स्थिति क्या थी।

विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता का सवाल
त्रैमासिक परीक्षा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के आकलन की प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्न-पत्र के कथित प्रसार का मामला केवल विभागीय लापरवाही के आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे विद्यार्थियों के बीच समान अवसर और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।यदि जांच में प्रश्न-पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले अनधिकृत रूप से साझा किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि प्रश्न-पत्र किस स्तर से बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा जगत के बीच बनी शंकाओं का समाधान हो सके।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल जिला प्रशासन ने मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कही है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार जांच टीम गठित की जा चुकी है। लेकिन शिकायत के करीब 15 दिन बाद भी जांच की प्रगति और कार्रवाई का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आने से सवाल बने हुए हैं।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में प्रश्न-पत्र के कथित परीक्षा पूर्व प्रसार, संबंधित संकुल केंद्रों की भूमिका, प्रश्न-पत्र साझा करने वाले व्यक्तियों तथा जिला शिक्षा अधिकारी के कथित बयान से जुड़े तथ्यों पर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मामले में वास्तविक दोष, जिम्मेदारी और विभागीय लापरवाही का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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