रायपुर :छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय द्वारा वर्ष 2019 में निकाली गई सहायक ग्रेड-3 (Assistant Grade-III) भर्ती परीक्षा के पीड़ित अभ्यर्थियों का सब्र अब टूट चुका है। विज्ञापन जारी होने के 7 साल बीत जाने, परीक्षा और परिणाम (मेरिट सूची) जारी होने के बावजूद विधानसभा प्रशासन द्वारा अब तक सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है। सरकारी सिस्टम की इस कछुआ चाल के कारण दर्जनों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है और कई अभ्यर्थी अब ओवरएज (आयु सीमा पार) होने की कगार पर हैं।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय ने मार्च 2019 में सहायक ग्रेड-3 के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन (संशोधित विज्ञापन संख्या 02/2019) जारी किया था। इसके बाद लिखित परीक्षा आयोजित की गई। प्रशासनिक लेती-लतीफी और कोरोना महामारी का हवाला देते हुए इस भर्ती को सालों तक लटका कर रखा गया।लंबी लड़ाई के बाद, अंततः जनवरी 2025 में अभ्यर्थियों की कंप्यूटर हिंदी टाइपिंग कौशल परीक्षा (Skill Test) आयोजित की गई। इसके तुरंत बाद विभाग ने कौशल परीक्षा के अंक, उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण सूची और अंतिम प्रावीण्य (Merit) सूची भी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी।
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अभ्यर्थियों की पीड़ा और सवाल:
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है, “जब परीक्षा के सभी चरण पूरे हो चुके हैं, मेरिट सूची सामने आ चुकी है, तो फिर नियुक्ति पत्र जारी करने में देरी क्यों की जा रही है? साल 2019 से लेकर आज 2026 आ चुका है, 7 साल की इस लंबी प्रतीक्षा ने हमें मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। हम अपनी योग्यता साबित करने के बाद भी बेरोजगार बैठने को मजबूर हैं।”
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा जैसी राज्य की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था में ही यदि युवाओं के रोजगार के अधिकार का इस तरह हनन होगा, तो युवा न्याय के लिए कहाँ जाएंगे? कई अभ्यर्थी इस मानसिक तनाव के कारण अवसाद (Depression) का शिकार हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें:
1. तत्काल नियुक्ति: विधानसभा सचिवालय बिना किसी और देरी के तत्काल अंतिम चयन सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) जारी करे।
2. समय-सीमा तय हो: प्रशासन आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट करे कि दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) और जॉइनिंग की प्रक्रिया कब तक पूरी की जाएगी।
यदि विधानसभा प्रशासन जल्द ही इस पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है, तो समस्त चयनित और प्रभावित अभ्यर्थी सामूहिक रूप से माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर करने और लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

