ECETD-2026 राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने तकनीक, शोध की गुणवत्ता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर किया मंथन
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा : आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय, छुरा में अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के तत्वावधान में “Ethical Challenge in Engineering & Technology Development (ECETD-2026)” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से पहुंचे शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने तेजी से विकसित हो रही तकनीक के नैतिक पक्ष, सामाजिक प्रभाव, शोध की गुणवत्ता तथा जिम्मेदार तकनीकी विकास पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।सम्मेलन का उद्देश्य यह रेखांकित करना रहा कि आधुनिक तकनीकी विकास केवल नवाचार, आर्थिक प्रगति और गति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें मानवीय मूल्य, सामाजिक उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, सुरक्षा और सतत विकास को भी समान महत्व दिया जाना आवश्यक है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार ने कहा कि इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी आज मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन और साइबर तकनीक ने विकास के नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इनके साथ अनेक नैतिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की वास्तविक सफलता तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा उसके प्रयोग से मानव गरिमा और सामाजिक मूल्यों की रक्षा हो।अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. एन.के. स्वामी ने कहा कि 21वीं सदी में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के साथ नैतिक निर्णय क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी की समझ विकसित करना भी जरूरी है।
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सम्मेलन के मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार ने उच्च शिक्षा में शोध की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल नए उपकरण तैयार करना नहीं, बल्कि मानव आवश्यकताओं की पूर्ति और समाज के कल्याण में योगदान देना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को निरंतर अभ्यास, जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।डॉ. कुमार ने शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और नैतिकता पर विशेष जोर देते हुए Research Integrity तथा Retracted Articles की अवधारणा को समझाया। उन्होंने प्रो. सी. राधाकृष्ण राव का उदाहरण देते हुए कहा कि सीखने और शोध की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने निरंतर प्रयास और नवाचार को सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
इसके बाद डॉ. ओमप्रकाश देवांगन ने “कोड से परे: इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग के दौर में डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम आधुनिक इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग की आधारभूत संरचना हैं। केवल कोडिंग का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि डेटा प्रबंधन, तार्किक सोच और प्रभावी समस्या-समाधान क्षमता भी तकनीकी दक्षता के लिए आवश्यक है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल तकनीक के विकास के साथ डेटा गोपनीयता, सुरक्षा, नैतिकता और तकनीकी जवाबदेही को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।अमिटी यूनिवर्सिटी रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय शर्मा ने इंजीनियरिंग विकास में सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी समाधान की सफलता केवल उसकी कार्यक्षमता से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसकी सुरक्षा, विश्वसनीयता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सतत एवं जिम्मेदार इंजीनियरिंग को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों और शोधार्थियों के बीच प्रश्नोत्तर एवं विचार-विमर्श भी हुआ। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपने शोध कार्यों को लेकर सुझाव प्राप्त किए तथा नए शोध आयामों को समझा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सम्मेलन के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. हनी गौर, सह संयोजक श्री दुष्यंत कुमार यादव तथा आयोजन समिति के सदस्य श्री संजीव जांगडे एवं सुश्री रीना चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. गौर ने अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।




