मुखिया के मुखारी -जो अपनी कमी से नही सीखते वों सदैव कमतर ही रहतें हैं
मुखिया के मुखारी -जो अपनी कमी से नही सीखते वों सदैव कमतर ही रहतें हैं
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी -जो अपनी कमी से नही सीखते वों सदैव कमतर ही रहतें हैं
मुखिया के मुखारी – कलमवीर अब दस्यु सरदार बन गए
मुखिया के मुखारी – ननकी को ननकी स नही कुंवर सा जैसा मान देना होगा
मुखिया के मुखारी – जनसंपर्क बना कर { हाथ } संपर्क है
मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मुखिया के मुखारी – मोर संग चलव रे ,मोर संग चलव गा
मुखिया के मुखारी – रंग बदलते -बदलते बेरंग न हो जाओ
मुखिया के मुखारी – टूटे भरोसे में सुसाशन सिर्फ दावा और दिखावा है
मुखिया के मुखारी – मुश्किल हो जायेगा आपका पुनर्वास