मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मुखिया के मुखारी – मोर संग चलव रे ,मोर संग चलव गा
मुखिया के मुखारी – रंग बदलते -बदलते बेरंग न हो जाओ
मुखिया के मुखारी – टूटे भरोसे में सुसाशन सिर्फ दावा और दिखावा है
मुखिया के मुखारी – मुश्किल हो जायेगा आपका पुनर्वास
मुखिया के मुखारी – राजनीति —कुछ ढपा, कुछ छिपा, कुछ नही खुला
मुखिया के मुखारी – दवा ,दारू दोनों में भ्रष्टाचार का नशा
मुखिया के मुखारी – सुशासन के लिए समदर्शिता है जरुरी
मुखिया के मुखारी – कर्महिनों को कर्मठता नही भाति